झारखण्ड रांची

झारखंड: मैट्रिक और इंटर के टॉपर्स को शिक्षा मंत्री ने ऑल्टो कार दी, कहा- अगली बार से टॉपर्स को गोद लूंगा ताकि वे पढ़ाई पूरी कर सकें

  • विधानसभा परिसर में आयोजित किया गया कार्यक्रम, विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो भी रहे मौजूद
  • स्पीकर ने कहा- ऑल्टो की स्पीड से बच्चे अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश में जुटेंगे, छात्रों को प्रेरणा मिलेगी

रांची: मैट्रिक और इंटरमीडिएट के राज्य टॉपर्स को शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो और विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने संयुक्त रूप से ऑल्टो कार का चाबी सौंपी। इस साल के मैट्रिक टॉपर मनीष कुमार कटियार और इंटर के ओवरऑल टॉपर अमित कुमार को यह सम्मान दिया गया। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि अगले साल से वे राज्य के टॉपर्स को गोद लेंगे ताकि वो बच्चा अपने आगे की पढ़ाई पूरी कर सके। उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च मैं खुद उठाऊंगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा- मैं खुद छात्र हूं, अगली बार मैं भी जीत सकता हूं प्राइज
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि मैं यहां मंत्री के साथ छात्र की हैसियत से भी खड़ा हूं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगले साल मैं भी यह प्राइज जीत सकता हूं। उन्होंने कहा कि रिजल्ट वाले दिन उन्होंने टॉपर्स को कार देने की घोषणा की थी जिसे आज पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सदन में एक साथी की ओर से सुझाव आया था कि बच्चों को कार न देकर उन्हें नगद राशि दी जाए, जिससे रकम उनके भविष्य की पढ़ाई में काम आ जाए। फिर शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस बार घोषणा कर दी है तो कार देनी पड़ेगी। अगली बार से टॉपर्स के आगे की पढ़ाई का सारा खर्च मैं खूद उठाऊंगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि वे पिछले 15 साल से अपने क्षेत्र के टॉपरों को विनोद बिहारी जयंती के दिन लैपटॉप देते आ रहे हैं। पहले उन्होंने घोषणा की थी कि उनके इंटर कॉलेज का कोई बच्चा अगर राज्य का टॉपर होगा तो उसे वे ऑल्टो कार देंगे। अब मंत्री बनने के बाद तो राज्य के सारे बच्चे अपने हुए। ऐसे में जो भी बच्चा टॉप किया, उसे तो ऑल्टो कार देनी ही थी। मंत्री बन जाने के बाद उन्होंने इस कार्यक्रम को भी राज्य स्तरीय कर दिया। कार, बाइक और साइकिल की खरीद पर कुल कितनी राशि खर्च हुई के सवाल पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब इतना क्या जोड़ना। समाज का काम है, समाज मेरे साथ है। बच्चों को इससे प्रोत्साहन मिलता है। वे और मन लगा कर पढ़ते हैं। इसे देखते हुए वे पैसे को यहां महत्व नहीं देते।

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