Uncategorized

उद्योगपतियों को कर्ज देने और कर्ज माफ करने का खेल, चोरी भी सीनाजोरी भी ।

मोदी जी की सरकार ने 2016 में संसद को बताया था की 50 करोड़ से अधिक कर्ज बकाया वाले उद्योगपतियों की संख्या 2071 थी जिनका कुल कर्ज तीन लाख 88 हजार करोड़ था । 2016 -17 में विलफुल डिफॉल्टर की संख्या 7079 हो गई और मार्च 2019 तक विलफुल डिफॉल्टर की संख्या बढ़कर 8582 हो गई, 2018 में केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया की अप्रैल 2014 से सितंबर 2017 तक 2 लाख 41 हजार करोड एनपीए था जो 2018 में बढ़कर साढे तीन लाख करोड़ हो गया। 2015 में मोदी जी की सरकार ने कर्ज़ों को पुनः निर्धारित करने के लिए ऐसेट क्वालिटी रिव्यू का नियम बनाया और बैंकों पर दबाव देकर अधिकांश कर्ज को एनपीए बनवा दिया ,जिसका नतीजा हुआ कि 2018 में एनपीए बढ़ कर 9 लाख 62 हजार करोड़ रूपया हो गया ।
अप्रैल 2014 से अप्रैल 20 18 तक तीन लाख करोड़ रूपया कर्ज माफ किया गया ,2014- 15 में एनपीए 4 .62% थी जो 2015 -16 में बढ़कर 7.79%और दिसंबर 2017 में एनपीए बढ़ कर 10.41% हो गया ।100 उद्योग पतियों का ही एनपीए 8 लाख करोड़ हो गया। पिछले 10 सालों में 7 लाख करोड़ रुपया कर्ज माफ किया गया जिसमें मोदी सरकार ने 5,55,603 रु माफ किया है। आजादी से लेकर 2008 तक बैंकों ने 18 लाख करोड़ कर्ज दिया था और 2008 से 2014 तक बैंकों ने 52 लाख करो रुपए कर्ज दिए थे ,2004 से 2014 तक 1 लाख 90 हजार करोड़ बट्टा खाता में डाला गया था यानी की माफ किया गया था, अप्रैल 2014 से अप्रैल 2018 तक 21 बैंकों का 3,16,500 करोड़ मोदी सरकार ने माफ किए ।
पिछले 4 वर्षों में 44900 करोड़ मात्र ही कर्ज की वसूली हो पाई। 1 जुलाई 2019 को लोकसभा में मोदी सरकार ने बताया कि 31 मार्च 2019 तक 95,19,547 (पनचानवे लाख उन्नीस हजार पांच सौ सैतालिस ) करोड़ का कर्ज वितरण किया गया है । एसबीआई पहले मुनाफा में चल रही थी मोदी की सरकार आने के बाद यह बैंक घाटे में चलने लगा। बैंक के वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक 2014 -15 में 13102 करोड का मुनाफा हुआ था और दो 2017 -18 में बैंक 6547 करोड़ का घटा में चला गया ,दो हजार अट्ठारह उन्नीस में बैंक को मात्र 862 करोड़ का फायदा हुआ पंजाब नेशनल बैंक 2013 -14 में 3343 करोड़ और 2014 15 में 3062 करोड़ के मुनाफे में चलने वाली बैंक दो हजार सत्रह अट्ठारह में 12282 करोड़ और दो हजार अट्ठारह उन्नीस में 9975 करोड़ के घाटे में चला गया ।
बैंक ऑफ़ बरोदा दो हजार सत्रह अट्ठारह में 2431 करोड़ के मुनाफे में था जो दो हजार अट्ठारह उन्नीस में घटकर मात्र 433 करोड़ फायदे में रहा। बैंक पर दबाव डालकर वसूल हो रहे कर्ज़ों को भी एनपीए में डाला गया, घाटे में चल रहे बैंकों से भी जबरन कर्ज दिलवाए गए और निवेश भी कराए गए ,दो हजार सत्रह अट्ठारह में एसबीआई के वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक घाटे में रहने के बावजूद तीन लाख करोड़ का निवेश कराया गया और चार लाख करोड़ रूपया कर्ज बटवाया गया ,8 जुलाई 2019 को केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि 1 अप्रैल 2014 से लेकर 31 मार्च 2019 तक बैंकों ने छह लाख 19 हजार 244 करोड़ रुपए को बट्टा खाता में डाला यानी कि माफ कर दिया गया लेकिन सरकार यह नहीं बताई कि किन-किन उद्योगपतियों का यह लोन माफ हुआ, सरकार उद्योगपतियों का नाम बताने में बहानेबाजी करती है ।18 जुलाई 2019 को सरकार ने लोकसभा में बताया कि 31 मार्च 2015 को बैंकों का एनपीए 3,23,464 करोड़ था जो 31 मार्च 2018 को 10 लाख 36 हजार एक सौ 87 करोड हो गया
1 जुलाई 2019 को केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया कि पिछले 5 वित्तीय वर्षों में 2,06,586 करोड़ की वसूली हुई है । आर्थिक अपराध के मामले में भी केंद्र सरकार का रवैया भेदभाव पूर्ण रहा है आर्थिक अपराध के मामले भी मोदी सरकार में बढ़े 2016 में आर्थिक अपराध के 25 मामले थी जो 2019 में बढ़कर 33 हो गई इसकी जानकारी भी केंद्र सरकार ने लोकसभा में दिया था । बैंक धोखाधड़ी के मामले में भी सरकार का भेदभाव का रवैया ही नजर आया है 1 जुलाई 2019 को केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया की सीबीआई के पास 2014 से लेकर 31 मई 2019 तक बैंकों ने 847 मामले दर्ज कराए थे लेकिन अभी तक मात्र 371 मामलों की जांच चल रही है 14 मामले बंद हो गए हैं 6 मामले में विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है और केवल 4 मामले में ही सजा हो पाई है ।
मुद्रा लोन के मामले में भी सरकार की रवैया ढीली ढाली रही है 16 जुलाई 2019 को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया की मुद्रा लोन का भी 17651 करोड़ रूपया एनपीए बन चुका है ।

मनोहर कुमार यादव
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष
समाजवादी पार्टी झारखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *